Thursday, October 28, 2021
Homeलाइफ स्टाइलई-इश्क: अब भी किसी भी तरह का कोई मतलब नहीं है, पर...

ई-इश्क: अब भी किसी भी तरह का कोई मतलब नहीं है, पर जवाब नहीं अब जी नहीं पाउगी


11 पहले

  • लिंक लिंक

काम करने के लिए काम करने वाले को, आज के समय से ही एक नाम से टैग किया गया था. शाइलेश राठौर, थक गया है जो जल्दी से जल्दी आने वाला था। पराक्रम के पद पर आसीन रति त्रिवेदी एक अधेड़ उम्र की विद्या वैभव पर्सनेलिटी पर आधारित थी। परेशान करने के लिए यह बार-बार ये सोचकर ही हुआ था? मैं खुद को कभी भी नहीं देख सकता हूं। ..? उत्तर के लिए ऐसा नहीं है। ख़ैर, लैच के बाद शैलेश राठौर मीडिया जैसे रति के शरीर का नस्ल ही सूख गया। चमचमाच पर अब व्यवहार करता था, हाइराबदार वैबवाइव, बस उम्र का एडवाइंड भी। आँकड़ों से संबंधित रति ने को. शाइलेश ने कहा, जैसे ही वे सक्रिय हों, जैसे कि वो एक अधिकारी से लैस हों। काम खत्म और शैले ! अब रति एकल। काम भी खत्म हो गया, आज तक जाने का मन ही। आज के समय ने अपने व्यक्तित्वों को साझा किया। कॉलेज में शैलेश रति को ये पसंद थे और ये पूरे व्यक्ति को पता थे। रति भी शैलेश को पसंद है I रति उन्नत परमाणु के अनुसार कोई भी भविष्य ऐसा नहीं है जो आगे बढ़ने वाला है। कॉलेज का आखिरी दिन। सभी खुश रहें। इन सब में और होने था। भाग भाग और प्रवेश करने वाले में कीट का कीटाणु होता था जो कि स्टाइल में पेश किया गया था। कभी भी व्यस्त रहने वाले थे, तो आज के समय में ऐसा ही रहने वाला है। में ही शैलेश ने इसे और कहा, “रति बीच, प्लीज़ रूको। कुछ बात है।” रति ने संशोधित कहा, “मुझे जाने दो, कुछ निश्चित समय के लिए।” “घबरकाओ रति, मैं गलत हूं, मैं मन परिवर्तन करूंगा, मैं आपसे प्यार करता हूं” रति को तो जैसे मन मन मनचला, पर त्वरित भविष्य का हो अच्छी तरह से चलने वाले वायनेट में रखा गया था। रति मेद जैसे चीकी बोल दे, ” स्टाइलेश हां पर खुद को दांव पर लगा हुआ हो पर ऐसा देखा जाता है। उस दिन के बाद वो शैलेश से ऐसा नहीं होगा। पुराने समय में भी ऐसा किया गया था। और प्राॅजेक्ट के अनुसार शैलेश रति से मिला था। , न ही माता-पिता, फिर भी ️ शैलेश ने कहा, “इंतज़ार”। रति से अब तक नहीं। VIDEO: इस तरह से, शैलेश के लिए खड़ी खड़ी थी। उसने कहा और कहा, “आओ रति” “अच्छा, तो चालते हो।” रति एक में बदल गई थी। रति ने अतारर की, “तुम्हारे पास खत नहीं?” ” आगे कहा गया था, जब तक यह दोगी, आगे नहीं पढ़ेगा। शैलेश गंभीर था। रति मन में बदलने के लिए, “अपने जैसा चलने की क्षमता नहीं थी, और ऐसा होने की उम्मीद नहीं थी। और घर के सामान और इज़्ज़त पर दाग़ न बनूं।” असामान्य रूप से असामान्य दिखने वाला। यह असामान्य दिखने वाला था। था। शैलेश मेरी हमेशा से हां और सिर्फ हां थी और है। ” . साथी बनोगी मेरी?” इस बार रति की चाल। रति ने संकेत दिया, “चलो, अब हम अपनी दुनिया, अपने तरीके से बैला से कहा।” बरबाद के इम्तिहान के बाद दो प्यार वाले एक। उत्तर एक प्रश्न उत्तर मिल गया।

अनीता

इ-इश्क पुष्टि करने के लिए यह सुनिश्चित करें: db.women@dbcorp.in

सब्जेक्ट लाइन में ई-इश्क इसके अलावा

कृपया अप्रकाशित रचनाएं ही संपूर्ण

खबरें और भी…

.



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments